Ajay Siyaram

AJAY SIYARAM

WRITER | SHAYAR

"मुझे अब दर्द भी.. ‘अजय' दर्द नहीं देता
मगर तेरी यादें ... मुझको खा जाती हैं!"

Kya Paresani Hai (क्या परेशानी है): emotional Sad Ghazal | Hindi Shayari by Ajay Siyaram

मोहब्बत हमारा ही मसला था, जुदाई हमें रुलाती है,

तो फिर नींद को क्या परेशानी है, जो मुझे आती नहीं है।


नाराज़गी दिल की थी, पर जिस्म का क्या वास्ता इससे?

तो फिर भूख को क्या परेशानी है, जो अब लगती नहीं है।


हुए हम जुदा थे, तो आँखों का इसमें भला क्या कुसूर?

मगर अश्कों की झड़ी को क्या परेशानी है, जो रुकती नहीं है।


लबों पे थी खामोशी, दिल ने तो कुछ भी कहा ही नहीं,

तो फिर धड़कन को क्या परेशानी है  जो पल भर थमती नहीं है।


मैं ज़िंदा तो हूँ, पर जीने की हसरत ही मर गई है,

तो फिर साँस को क्या परेशानी है, जो जिस्म से निकलती नहीं है।


'अजय' ने तो महज़, अपना एक शख्स ही खोया है,

मगर दुनिया को क्या परेशानी है, जो मुझे समझती नहीं है।