Ajay Siyaram

AJAY SIYARAM

WRITER | SHAYAR

"मुझे अब दर्द भी.. ‘अजय' दर्द नहीं देता
मगर तेरी यादें ... मुझको खा जाती हैं!"

Zinda Lash (ज़िंदा लाश) | Heart Touching Sad Ghazal in Hindi

 


 साँसें तो चल रही हैं, मगर जान नहीं है,

ये जिस्म वो खंडहर है, जहाँ इंसान नहीं है।


वो चूमती है माथा, तो चुभन सी होती है,

अब लाश को सजाने का, कोई अरमान नहीं है।


खुरच दिया है खुद को, तेरी याद मिटाने को,

ज़ख्म तो हैं गहरे, पर कोई निशान नहीं है।


ख़ुदा ने भी क्या ख़ूब तमाशा किया मेरे साथ,

बाँध दिया वहाँ, जहाँ मेरा जहान नहीं है।


मैं चीखना तो चाहता हूँ, उस अजनबी के सामने,

मगर मेरे गले में अब, वो ज़ुबान नहीं है।


समेट ले 'अजय', अपनी राख को मुट्ठी में,

अब मेरे बिखरने का भी, कोई नुकसान नहीं है।


अजय सियाराम