मक़ाम- अजय सियाराम Ajay Siyaram जनवरी 09, 2026दिन भर बिखरते रहे हम ज़माने के काम में “अजय” रात को समेटेंगे खुद को, एक नए मक़ाम में।" Continue Reading
ग़ज़ल: मुझे नींद नहीं आती - अजय सियाराम Ajay Siyaram जनवरी 09, 2026सब कुछ लुट गया मेरा, बस एक 'याद' नहीं जाती , बिस्तर काँटों सा चुभता है, मुझे नींद नहीं आती । महफ़िलें अब तो मुझे, काटने को दौड़ती ... Continue Reading
ग़ज़ल: साँसें और सन्नाटा Ajay Siyaram जनवरी 08, 2026ये साँसें चल रही हैं, इक बहाना था, हक़ीक़त में, मुझे कब का गुज़र जाना था। हँसता हूँ महफ़िल में, कि कोई शक न करे, वरना इन आँखों ने, समंदर को ... Continue Reading