Ajay Siyaram

AJAY SIYARAM

WRITER | SHAYAR

"मुझे अब दर्द भी.. ‘अजय' दर्द नहीं देता
मगर तेरी यादें ... मुझको खा जाती हैं!"

Sansein aur Sannata : Emotional Hindi Poem on Loneliness | साँसें और सन्नाटा

ये साँसें चल रही हैं, इक बहाना था,

हक़ीक़त में, मुझे कब का गुज़र जाना था।


हँसता हूँ महफ़िल में, कि कोई शक न करे,

वरना इन आँखों ने, समंदर को छुपाना था।


जिस्म मौजूद है यहाँ, किसी और की पनाह में,

रूह का तो मगर, तेरे दर पे ठिकाना था।


छू भी ले कोई मुझे, तो मैं पत्थर ही रहता हूँ,

मेरे जज़्बातों का हक़दार, सिर्फ़ एक पुराना था।


किस्मत ने थमा दिया हाथ, ग़ैरों के हाथ में,

लकीरों को शायद, मेरी हँसी को मिटाना था।


दुनिया समझती है 'अजय', कि संभल गया है तू,

उन्हें क्या खबर, मुझे ख़ामोशी से बिखर जाना था।


 अजय सियाराम