Ajay Siyaram

AJAY SIYARAM

WRITER | SHAYAR

"मुझे अब दर्द भी.. ‘अजय' दर्द नहीं देता
मगर तेरी यादें ... मुझको खा जाती हैं!"

Ankho ki Gawahi (आँखों की गवाही): Emotional Ghazal

ये आँखों के जो घेरे हैं, कहानी ये सुनाते हैं,

जुदाई में कटे लम्हे, हमें कितना रुलाते हैं


सबब पूछा जो लोगों ने, मेरी इस ज़र्द हालत का,

तेरी यादें मुझे अब, दीमक की सूरत खाते हैं


लबों से झूठ मैं अपना, छुपा लेता हूँ महफ़िल में,

मगर ये सुर्ख आँखें, सारा राज़ बताते हैं


तेरी यादों से मेरा, कुछ अनोखा रब्त है ऐसा,

कि अब तो नींद के लम्हे, हमें बस अब सताते हैं


अब उजाले से भी मुझको, ख़ौफ़ सा आने लगा है,

पुराने ज़ख्म ये सूरज, हमें साफ़ दिखाते हैं


'अजय' आईना देखूँ तो, खुद अपना अक्स डरता है,

वो बीते दिन ही अब हमको, यहाँ तक ले के आते हैं