Ajay Siyaram

AJAY SIYARAM

WRITER | SHAYAR

"मुझे अब दर्द भी.. ‘अजय' दर्द नहीं देता
मगर तेरी यादें ... मुझको खा जाती हैं!"

Beasar Cheekhein ( बेअसर चीखें)💔 Ek Dard Bhari Ghazal (Emotional Sad Shayari)

गला फाड़ कर चीखा, मगर सुनवाई नहीं होती,

बहुत चाहा मगर इस दर्द से, रिहाई नहीं होती।


पटक कर सर दीवारों पर, लहू भी बह गया लेकिन,

मेरे टूटे हुए दिल की, कोई भरपाई नहीं होती।


मेरे अंदर कोई घुट-घुट के, मरता जा रहा है अब,

मगर इस क़त्ल की बाहर, गवाही नहीं होती।


ख़ुदा से माँग ली मौत, वो भी मुँह फेर बैठा है,

ये वो बीमारी है जिसकी, कोई दवाई नहीं होती।


नशा, मातम, अंधेरा, सब आज़मा कर देख ली मैंने,

तेरी यादें कभी दिल से, पराई नहीं होती।


बचा ले कोई 'अजय' को, इस गहरे अंधेरे से,

यहाँ तो साथ मेरे, मेरी परछाई नहीं होती।


 अजय सियाराम