Ajay Siyaram

AJAY SIYARAM

WRITER | SHAYAR

"मुझे अब दर्द भी.. ‘अजय' दर्द नहीं देता
मगर तेरी यादें ... मुझको खा जाती हैं!"

Aakhri Ichha (आख़िरी इच्छा) Heart Touching Sad Ghazal on Death & Love

           


धागा ये चाहतों का, पल में तोड़ दोगी क्या,

गुस्से में आ के मुझको, ऐसे छोड़ दोगी क्या !


मैं मर रहा हूँ तेरी याद में, तड़प-तड़प कर,

मेरी तरफ से आज तुम, रुख मोड़ दोगी क्या !


लिखे थे जो भी मैंने, जज़्बात कोरे कागज़,

वो सारे पन्ने गुस्से में, मरोड़ दोगी क्या !


बची-कुची हैं जो साँसें, मेरे इस सीने में,

उन्हें भी अपने हाथों से, निचोड़ दोगी क्या !


मैं लेट गया हूँ थक के, अब मौत की आगोश में,

मुझे नींद से जगाने को, तुम झिंझोड़ दोगी क्या !


साँसें उखड़ रही हैं 'अजय' की, तेरी गोद में,

टूटे हुए इस दिल को, फिर जोड़ दोगी क्या !


 अजय सियाराम