Ajay Siyaram

AJAY SIYARAM

WRITER | SHAYAR

"मुझे अब दर्द भी.. ‘अजय' दर्द नहीं देता
मगर तेरी यादें ... मुझको खा जाती हैं!"

Heer Ranjha Ki Kahani: Khwab Mein Aayi Wo Heer (Emotional Love Sad Story) Part-1

सुन ले 'चीनवा', एक राज़ बताता हूँ,

आज रात का वो मंज़र दिखाता हूँ।

सोते हुए नसीब में, एक रोशनी आई थी,

मेरे वीराने में, साक्षात 'हीर' आई थी।"


"आँख खुली तो लगा, सब सच होगा,

सामने खड़ा वही, महबूब होगा।

मगर हाय! वो तो बस नज़रों का धोखा था,

हाथ में आया बस, हवा का झोंका था।"


"इंसान तो वो, हरगिज़ न लगती थी,

जन्नत की कोई हूर ही फबती थी।

मेरा तो बस यही, एक ख़याल था,

कि ज़मीन पर उतरी, वो कोई 'परी' थी।"


"वो रेशम में लिपटी थी, या आग में?

सुर्ख (लाल) जोड़े में थी, वो बाग़ में।

कारीगर ने भी, क्या कमाल किया था,

लाल रंग से, क़यामत का सवाल किया था।"


"उसकी आँखों में, काजल की रात थी,

उनमें छिपी, कोई गहरी बात थी।

एक बार जो देखा, भरकर नज़रों से,

फिर न दिन रहा, न कोई रात थी।"


"होंठ खुले तो, जैसे फूल झड़ गए,

बिजली सी कौंधी, बादल गड़गड़ गए।

वो दूर खड़ी, बस मुस्कुरा रही थी,

मेरे होश-ओ-हवास, सब गड़बड़ गए।"


"कमर की लचक, जैसे तूफ़ान हो,

मोर की चाल पर, जंगल कुर्बान हो।

कदम ऐसे रखे, गिन-गिन कर ज़मीन पर,

जैसे वो ही इस दुनिया की, जान हो।"


"इशारे से उसने, फिर पास बुलाया,

अपनी खुशबू से, मुझको महकाया।

आहिस्ता से आकर, मेरे पहलू में बैठी,

मेरे दिल ने, धड़कना भी भुलाया।"


"मेरे जिस्म में फिर, एक सिहरन दौड़ गई,

तन्हाई की जंजीरें, सारी तोड़ गई।

ख्वाब में ही सही, जब कलाई थामी उसने,

वो अपनी लकीरें, मेरे हाथ छोड़ गई।"


"रब ने उसे, बड़ी फुर्सत में बनाया होगा,

खुद अपने हाथों से, उसे सजाया होगा।

कुदरत ने भी, कोई कमी न छोड़ी,

चाँद को भी शायद, उसने जलाया होगा।"


"अब एक ही धुन है, एक ही रट है,

उस 'हीर' के बिना, ये साँसें विकट हैं।

गर हो जाए मुकम्मल, उससे सगाई,

तो समझ लेना जन्नत, मेरे निकट है।"